गुरुवार, 19 नवंबर 2009

सब सही अपनी जगह हैं
सबका अपना न्याय है
चाह के सागर में सबकी
अपनी - अपनी नाव है

एक झोंका
स्वप्न टूटा
तुम न टूटे
तुम न झूठे
तो अमिट हो
कालजित हो

हर नज़र में
सच छुपा है
हर नज़र में
जिंदगी है
देख पायें हम उसे तो
ये हमारी रोशनी है ........
दरियादिली है ..........
सब सही अपनी जगह हैं
सबका अपना न्याय है
चाह के सागर में सबकी
अपनी - अपनी नाव है

एक झोंका
स्वप्न टूटा
तुम न टूटे
तुम न झूठे
तो अमिट हो
कालजित हो

हर नज़र में
सच छुपा है
हर नज़र में
जिंदगी है
देख पायें हम उसे तो
ये हमारी रोशनी है ........
दरियादिली है ..........

शुक्रवार, 13 नवंबर 2009





सत्य की खोज विरोधाभासों से भरी होती है